19 मई 2014 - 18:48

इंसान के इल्म के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह ख़ुदा की इबादत करे , और जिहालत के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह अपनी राय पर ख़ुशहाल हो जाए ।

کَفیٰ بِالمَرءِ عِلمًا اذا عَبَدَ اللہَ، و کَفیٰ بِالمَرءِ جَھلًا اذا اُعجِبَ بِرَأیِہِ

रसूले - ख़ुदा ( सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही वसल्लम ) : इंसान के इल्म के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह ख़ुदा की इबादत करे , और जिहालत के लिये इतना ही काफ़ी है , कि वह अपनी राय पर ख़ुशहाल हो जाए ।

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